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गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य

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श्रीमद् भगवद् गीता .(SHRIMAD BHAGWAT GEETA (the god of shri krihna sing)
गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य   जिस प्रकार हम पुराने वस्त्रो को त्याग कर नए वस्त्रो को धारण करते है,  उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर के नष्ट होने पर नए शरीर को धारण करती है।  जिस मनुष्य ने गीता के सार को अपने जीवन मे अपना लिया उसे ईश्वर की कृपा पाने के लिए इधर उधर नही भटकना पड़ेगा।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य जिस प्रकार हम पुराने वस्त्रो को त्याग कर नए वस्त्रो को धारण करते है, उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर के नष्ट होने पर नए शरीर को धारण करती है। जिस मनुष्य ने गीता के सार को अपने जीवन मे अपना लिया उसे ईश्वर की कृपा पाने के लिए इधर उधर नही भटकना पड़ेगा।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता सिर्फ एक पुस्तक नही है, यह तो जीवन मृत्यु के दुर्लभ सत्य को अपने मे समेटे हुए है।  कृष्ण ने एक सच्चे मित्र और गुरु की तरह अर्जुन का न सिर्फ मार्गदर्शन किया बल्कि गीता का महान उपदेश भी दिया।  उन्होने अर्जुन को बताया कि इस संसार मे हर मनुष्य के जन्म का कोई न कोई उद्देशय होता है।  मृत्यु पर शोक करना व्यर्थ है, यह तो एक अटल सत्य है  जिसे टाला नही जा सकता। जो जन्म लेगा उसकी मृत्यु भी निश्चित है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता सिर्फ एक पुस्तक नही है, यह तो जीवन मृत्यु के दुर्लभ सत्य को अपने मे समेटे हुए है। कृष्ण ने एक सच्चे मित्र और गुरु की तरह अर्जुन का न सिर्फ मार्गदर्शन किया बल्कि गीता का महान उपदेश भी दिया। उन्होने अर्जुन को बताया कि इस संसार मे हर मनुष्य के जन्म का कोई न कोई उद्देशय होता है। मृत्यु पर शोक करना व्यर्थ है, यह तो एक अटल सत्य है जिसे टाला नही जा सकता। जो जन्म लेगा उसकी मृत्यु भी निश्चित है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता हमे जीवन के शत्रुओ से लड़ना सीखाती है, और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने मे भी मदद करती है।  गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। गीता मे कर्म को बहुत महत्व दिया गया है।  मोक्ष उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो अपने सारे सांसारिक कामों को करता हुआ ईश्वर की आराधना करता है।  अहंकार, ईर्ष्या, लोभ आदि को त्याग कर मानवता को अपनाना ही गीता के उपदेशो का पालन करना है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता हमे जीवन के शत्रुओ से लड़ना सीखाती है, और ईश्वर से एक गहरा नाता जोड़ने मे भी मदद करती है। गीता त्याग, प्रेम और कर्तव्य का संदेश देती है। गीता मे कर्म को बहुत महत्व दिया गया है। मोक्ष उसी मनुष्य को प्राप्त होता है जो अपने सारे सांसारिक कामों को करता हुआ ईश्वर की आराधना करता है। अहंकार, ईर्ष्या, लोभ आदि को त्याग कर मानवता को अपनाना ही गीता के उपदेशो का पालन करना है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था । कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है , असली कुरुक्षेत्र तो तुम्हारे अंदर है। अज्ञानता या अविद्या धृतराष्ट्र है,  और हर एक आत्मा अर्जुन है। और तुम्हारे अन्तरात्मा मे श्री कृष्ण का निवास है , जो इस रथ रुपी शरीर के सारथी है। ईंद्रियाँ इस रथ के घोड़ें हैं। अंहकार, लोभ, द्वेष ही मनुष्य के शत्रु हैं।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था । कृष्ण ने अर्जुन को बताया कि यह संसार एक बहुत बड़ी युद्ध भूमि है , असली कुरुक्षेत्र तो तुम्हारे अंदर है। अज्ञानता या अविद्या धृतराष्ट्र है, और हर एक आत्मा अर्जुन है। और तुम्हारे अन्तरात्मा मे श्री कृष्ण का निवास है , जो इस रथ रुपी शरीर के सारथी है। ईंद्रियाँ इस रथ के घोड़ें हैं। अंहकार, लोभ, द्वेष ही मनुष्य के शत्रु हैं।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य  गीता मे लिखे उपदेश किसी एक मनुष्य विशेष या किसी खास धर्म के लिए नही है, इसके उपदेश तो पूरे जग के लिए है।  जिसमे आध्यात्म और ईश्वर के बीच जो गहरा संबंध है उसके बारे मे विस्तार से लिखा गया है। गीता मे धीरज, संतोष, शांति, मोक्ष और सिद्धि को प्राप्त करने के बारे मे उपदेश दिया गया है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता मे लिखे उपदेश किसी एक मनुष्य विशेष या किसी खास धर्म के लिए नही है, इसके उपदेश तो पूरे जग के लिए है। जिसमे आध्यात्म और ईश्वर के बीच जो गहरा संबंध है उसके बारे मे विस्तार से लिखा गया है। गीता मे धीरज, संतोष, शांति, मोक्ष और सिद्धि को प्राप्त करने के बारे मे उपदेश दिया गया है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता, जो लोग वेदों को पूरा नही पढ़ सकते,  सिर्फ गीता के पढ़ने से भी आप को ज्ञान प्राप्ति हो सकती है।  गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है  बल्कि परमात्मा के अनंत रुप से हमे रुबरु कराती है।  इस संसारिक दुनिया मे दुख, क्रोध, अंहकार ईर्ष्या आदि से पिड़ित आत्माओं को, गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता को वेदों और उपनिषदों का सार माना जाता, जो लोग वेदों को पूरा नही पढ़ सकते, सिर्फ गीता के पढ़ने से भी आप को ज्ञान प्राप्ति हो सकती है। गीता न सिर्फ जीवन का सही अर्थ समझाती है बल्कि परमात्मा के अनंत रुप से हमे रुबरु कराती है। इस संसारिक दुनिया मे दुख, क्रोध, अंहकार ईर्ष्या आदि से पिड़ित आत्माओं को, गीता सत्य और आध्यात्म का मार्ग दिखाकर मोक्ष की प्राप्ति करवाती है।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य  गीता को हिन्दु धर्म मे बहुत खास स्थान दिया गया है।  गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उपदेशो को समेटे हुए है।  गीता को आम संस्कृत भाषा मे लिखा गया है, संस्कृत की आम जानकारी रखना वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है।  गीता मे चार योगों के बारे विस्तार से बताया हुआ है, कर्म योग, भक्ति योग, राजा योग और जन योग।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य गीता को हिन्दु धर्म मे बहुत खास स्थान दिया गया है। गीता अपने अंदर भगवान कृष्ण के उपदेशो को समेटे हुए है। गीता को आम संस्कृत भाषा मे लिखा गया है, संस्कृत की आम जानकारी रखना वाला भी गीता को आसानी से पढ़ सकता है। गीता मे चार योगों के बारे विस्तार से बताया हुआ है, कर्म योग, भक्ति योग, राजा योग और जन योग।

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य  जिसने श्रुतियों के तात्पर्य का यथार्थ ज्ञान ही प्राप्त नहीं कर लिया,  बल्कि उनका साक्षात्कार भी कर लिया है और इस प्रकार जो अटल निश्चय से संपन्न हो गया है,  वह समस्त प्राणियों का हितैषी सुहृद होता है और उसकी साड़ी वृत्तियाँ सर्वथा शांत रहती हैं|  वह समस्त प्रतीयमान विश्व को मेरा ही स्वरुप – आत्मस्वरूप देखता है; इसलिए उसे फिर कभी जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं पड़ना पड़ता |

Krishna - O Deus dos Deuses, "o mais atraente", e a causa de tudo e todos.

गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य  जो पुरुष गुण और दोष बुद्धि से अतीत हो जाता है,  वह बालक के समान निषिद्ध कर्मों से निवृत्त होता है ;  परन्तु दोष बुद्धि से नहीं | वह विहित कर्मों का अनुष्ठान भी करता है, परन्तु गुण बुद्धि से नहीं |

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गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य   जिस पुरुष का मन अशांत है, असयंत है उसी को पागलों की तरह अनेकों वस्तुयें मालूम पड़ती हैं  ; वास्तव में यह चित्त का भ्रम ही है | नानात्व का भ्रम हो जाने पर ही “यह गुण है”  और “यह दोष है” इस प्रकार की कल्पना करी जाती है |  जिसकी बुद्धि में गुण और दोष का भेद बैठ गया हो, दृणमूल हो गया है,  उसी के लिए कर्म, अकर्म और विकर्म रूप का प्रतिपादन हुआ है |

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गीता सार: संक्षिप्त मे गीता रहस्य श्री कृष्ण का मानव जीवन जीने का उपदेश  श्रीमद भगवद एकादश स्कंध अध्याय ७ श्लोक ६-१२  तुम अपने आत्मीय स्वजन और बन्धु-बांधवों का स्नेह सम्बन्ध  छोड़ दो और अनन्य प्रेम से मुझमें अपना मन लगाकर सम दृष्टी से पृथ्वी पर स्वच्छंद विचरण करो|  इस जगत में जो कुछ मन से सोचा जाता है,  वाणी से कहा जाता है, नेत्रों से देखा जाता है, और श्रवण आदि इन्द्रियों से अनुभव किया जाता है,  वह सब नाशवान है, स्वप्न की तरह मन का विलास है|  इसीलिए माया-मात्र है, मिथ्या है-ऐसा जान लो |

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